Mere Alfaaz Heart Touching
Hindi Poem, Shayari, Story, Ghazal
वो दिन à¤à¥€ कà¥à¤¯à¤¾ दिन थे, जब मां लोरियां गाती थी।
अपने आंचल की छांव से जब चà¥à¤ªà¤•े से उठाती थी।
ठाठहमारे कोन सा कम थे हम दोबारा से सो जाते थे।
देख हमारे नखरे फिर वो जोरो से चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥€ थी।
नहला धà¥à¤²à¤¾, कंघी तेल लगा जब सà¥à¤•ूल तक पहà¥à¤‚चाती थी।
तब जाकर ही शायद वो à¤à¤• निवाला खाती थी।
दिन à¤à¤° करती काम मगर माथे पे सिकन न आती थी।
अकà¥à¤¸à¤° अपनी फटी à¤à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सबसे वो छिपाती थी।
है कितने à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¨ तेरे, इस जनà¥à¤® चà¥à¤•ा ना पाऊंगी।
तेरे कदमों की मिटà¥à¤Ÿà¥€ अपने सर माथे लगाऊंगी।
"कोमल रावत"
About Mere Alfaaz
मेरे अल्फ़ाज़ एक छोटा सा शब्द लेकिन समा जाते है इसमें सारे ज़ज़्वात ।
मेरे अल्फ़ाज़ एक मंच ही नही एक सँसार है । अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का । अपने ज़ज्वतों का सागर भरने का । यह मंच उन सभी को अबसर देने का प्रयास करता है , जो लेखन में रूचि रखते हैं ।
अपने मन के भाव , अपने अल्फ़ाज़ में लिखते हैं । कविता गीत ग़ज़ल या हो कहानी साहित्य कि कोई भी विधा । हर विधा का स्वरचित साहित्य सृजन आमन्त्रित है इस मंच पर ।
मेरे अल्फ़ाज़ छोटा सा प्रयास है शहर गाँव कस्बो से निकल सब को एक मंच पर लाने का । अपने क्षेत्र अपनी डायरी तक सिमित न रहते हुए हम विश्व पटल पर अपने आपको ला सकें। अपने सृजन अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने का सशक्त मंच ।
मेरे अल्फ़ाज़ । 26 नबम्बर 2015 से माँ वाणी की कृपा से यह अभियान प्रारम्भ हुआ । आज इस मंच से कई प्रतिभाशाली रचनाकार जुड़े जो अपने सृजन से साहित्य जगत को नई दिशा दे रहे हैं । अपनी पहचान लोगो के दिलों में बना रहे हैं ।

