मेरे अल्फ़ाज़ एक छोटा सा शब्द लेकिन समा जाते है इसमें सारे ज़ज़्वात ।

मेरे अल्फ़ाज़ एक मंच ही नही एक सँसार है । अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का । अपने ज़ज्वतों का सागर भरने का । यह मंच उन सभी को अबसर देने का प्रयास करता है , जो लेखन में रूचि रखते हैं । अपने मन के भाव , अपने अल्फ़ाज़ में लिखते हैं । कविता गीत ग़ज़ल या हो कहानी साहित्य कि कोई भी विधा । हर विधा का स्वरचित साहित्य सृजन आमन्त्रित है इस मंच पर । मेरे अल्फ़ाज़ छोटा सा प्रयास है शहर गाँव कस्बो से निकल सब को एक मंच पर लाने का । अपने क्षेत्र अपनी डायरी तक सिमित न रहते हुए हम विश्व पटल पर अपने आपको ला सकें। अपने सृजन अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने का सशक्त मंच ।

मेरे अल्फ़ाज़ । 26 नबम्बर 2015 से माँ वाणी की कृपा से यह अभियान प्रारम्भ हुआ । आज इस मंच से कई प्रतिभाशाली रचनाकार जुड़े जो अपने सृजन से साहित्य जगत को नई दिशा दे रहे हैं । अपनी पहचान लोगो के दिलों में बना रहे हैं । हम माँ वाणी से कामना करते हैं की हमें , इतना सामर्थ प्रदान करें की हम देश दुनिया से प्रतिभाओं को एक मंच पर लाकर उन्हें एक पहचान दे सकें । देश समाज विश्व को एक नई दिशा जिनके सृजन से मिल सके । और अंत में ... इन दो पँक्तियो के साथ ।

होंसले ही मुक़ाम दिलाते हैं । मुसाफ़िर अकेले तो थक जाते है ।

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